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पहली नज़र में इश्क़ हुआ,
तेरी भोली सूरत पे ये दिल क़ुरबान हुआ।
फिर वक़्त की रफ़्तार तेज हुई,
तेरा मेरा मिलना भी कई बार हुआ।
जितना जाना तुझे करीब से,
उतना ही तुझसे प्यार हुआ।
तुम हो भी, और नहीं भी,
ये स्वप्न है, हकीकत भी।
अब मेरी चाहत ने कहा मुझसे,
VP, तुझे मुहब्बत हो गयी है उससे।
डर है बस मुझे एक ही,
कहीं ये अपने आखिरी अंजाम तक ना पहुँच जाए।
हुआ था कभी इश्क़ मुझे,
तू कहीं अब मेरी इबादत ना बन जाए।
- V. P. "नादान "
